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23/04/17 - उजड़ता लोकतंत्र - यूएपीए और राजनैतिक मुकदमें

पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर)

आम सभा निमंत्रण

उजड़ता लोकतंत्र - यूएपीए और राजनैतिक मुकदमें

 

वक्ता – अरुण फरेरा (कमिटी फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ डेमोक्रेटिक राइट्स, मुंबई), शरफुद्दीन अहमद (पीपल्स मूवमेंट अगेंस्ट यूएपीए, केरल), गौतम नवलखा (पीयूडीआर, दिल्ली)

 

दिनांक – 23 अप्रैल 2017, समय – शाम 3.45 बजे, जगह – आईएसआई, लोधी रोड, साईं मंदिर के पास, नई दिल्ली, जवालाहर लाल नेहरु स्टेडियम मेट्रो स्टेशन के पास

 

जब राजसत्ता की विचारधारा के विरुद्ध या उसकी आलोचना करती कोई विचारधारा पनपती है और जनता से बड़े स्तर पर समर्थन प्राप्त करती है तो बौखलाकर सत्ताधारी उस विपरीत विचारधारा के समर्थन में उठती आवाजों को कुचलने की कोशिश करते हैं | ऐसे में उस संघर्ष से जुड़े या जुड़े हुए प्रतीत होते सभी लोगों को राजद्रोही घोषित कर दिया जाता है | संगठनों को प्रतिबंधित किया जाता है | संघर्ष के समर्थन में बोलने, लिखने, सोचने, पढने, संगठित होने जैसी मूलभूत आजादियों और जनवादी अधिकारों पर भी निशाना साधा जाता है | लोगों को जेलों में बंद कर दिया जाता है | इसी परिप्रेक्ष्य में यूएपीए जैसे एकतरफा और काले क़ानून राजसत्ता के फायदे के लिए प्रयोग में लायें जाते हैं | विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 या यूएपीए हमारे देश के उन काले कानूनों में से एक है जो न सिर्फ संविधान में दिए मूलभूत अधिकारों का धड़ल्ले से हनन करता है बल्कि जनवादी अधिकारों को अमल में लाने के लक्ष्यों को कोसों दूर कर देता है | इस क़ानून के अंतर्गत अपराधप्रणाली में उन मूलभूत नियमों को भी ताक पर रख दिया जाता है जो आम तौर पर अभियुक्त के हितों की रक्षा के लिए लागू होते हैं | सशस्त्र संघर्ष क्षेत्रों में जेलों में सढ़ रहे हज़ारों आदिवासी, कश्मीरी, उत्तर-पूर्वी लोग और अभियोग से भी पहले आतंकवादी घोषित किये गये मुसलमान आज इस काले क़ानून के दमन चक्र के नियमित भुक्तभोगी बन चुके हैं | 7 मार्च 2017 को गदचिरोली सत्र न्यायालय द्वारा दिया गया फैसला इन बातों को प्रखर रूप से चिन्हित करता है जहां 6 लोगों को यूएपीए की धाराओं के तेहत अपराधी घोषित किया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई |

 

इस सन्दर्भ में पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर) यूएपीए के बारे में एक चर्चा आयोजित कर रहा है | चर्चा में इस काले क़ानून के इतिहास, इसके प्रावधानों और ज़मीनी स्तर पर इसे किस प्रकार लागू किया जा रहा है, इसे समझने का प्रयास किया जाएगा | यह समझने का प्रयास किया जाएगा की कैसे इस क़ानून के उपयोग से संगठनों को प्रतिबंधित किया जा रहा है और राजनैतिक कार्यकर्ताओं को बंदी बनाया जा रहा है | उद्देश्य है की इस चर्चा के बाद यूएपीए को रद्द करने और राजनैतिक बंदियों की रिहाई की मांग के लिए आन्दोलन को और केन्द्रित किया जा सके |

 

आपको और आपके संगठन को पीयूडीआर इस चर्चा में भाग लेने के लिए आमंत्रित करता है |

सीजो जॉय, अनुष्का सिंह

सचिव, पीयूडीआर

संपर्क – 9818405329