Denial of Justice

बारा हत्याकांड मामले में फांसी की सज़ा को उम्रकैद में बदला जाना: अधूरा न्याय

1992 में बिहार के हुए बारा हत्याकांड के मामले, जिसमें 35 भूमिहार जाति के लोगों की हत्या हुई थी, के सज़ायाफ्ता नन्हे लाल मोची, वीर कुअर पासवान, कृष्णा मोची (तीनों दलित) और धमेन्द्र सिंह की फांसी की सज़ा को राष्ट्रपति द्वारा उम्रकैद में बदले जाने का पीयूडीआर स्वागत करता है। परन्तु इस मामले में फांसी को उम्रकैद में बदला जाना अधूरा न्याय है क्योंकि इससे संबंधित शर्तों के बारे में किसी तरह की स्पष्टता के अभाव में ये चार कैदी अनिश्चित समय के लिए जेल में सड़ते रहेंगे। इन चार कैदियों को 2001 में टाडा डेज़िगनेटिड कोर्ट ने एक अत्यधिक पक्षपाती मुकदमे द्वारा फांसी की सज़ा सुनाई थी और 2002 में सर्वोच्च न्याय

Commutation of Death Sentence in the Bara Massacre Case: Justice Half Done

PUDR welcomes the decision of the President commuting the death sentences of Nanhe Lal Mochi, Veer Kuar Paswan, Krishna Mochi and Dharmender Singh, convicted in the Bara massacre of 1992 for killing 35 members of the Bhumihar caste in Bihar. Commutation in this case, however, is justice half done as the four prisoners will continue to languish in jail indefinitely in the absence of any clarity on the terms of commutation. The four prisoners were sentenced to death in 2001 by a TADA designated court in an extremely biased trial and the sentence was upheld by the Supreme Court in 2002.

मौतों की फ़सल - बिहार के हत्याकांड और न्याय का सवाल

ग्रामीण बिहार में 1980 और 1990 के दशक में हुए हत्याकांडों के इतिहास के सन्दर्भ में और पीयूडीआर द्वारा किये गए अलग-अलग फैक्ट फाइंडिंग जांचों की मदद से, हम बिहार के गया ज़िले के बारा गाँव

Condemn police brutality on students and teachers in University of Hyderabad

PUDR strongly condemns the brutal police action unleashed on students and teachers at the University of Hyderabad campus on 22nd March 2016. This took place when students were protesting against the return of the Vice Chancellor Appa Rao Poddile to the campus after he had gone on leave following the suicide of Dalit PhD scholar Rohith Vemula in January.  Prof.

Additional facts regarding Open Letter to the Chief Justice of India for immediate intervention into physical attacks and eviction drives against women activists by police and vigilante groups in Chhattisgarh

PEOPLE’S UNION FOR DEMOCRATIC RIGHTS
 
To,
Chief Justice of India
Supreme Court of India
Tilak Marg
New Delhi-110 201 (India)
 

पीयूडीआर मांग करता है कि मुज़फ्फरनगर दंगों के गवाहों को न्यायालयों द्वारा तुरंत सुरक्षा दी जाए, और न्यायपूर्ण फैसले दिए जाएँ !

2013 में मुज़फ्फरनगर में हुऐ दंगों से सम्बंधित हत्याओं, बलात्कार, लूट और आगज़नी के मामलों में आरोपियों के बरी होने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं | पीयूडीआर चिंता व्यक्त करता है कि 2013 में मुज़फ्फरनगर के दंगों के बाद डर और खुली छूट का जो माहौल बना था, वह आज भी बरकरार है | आरोपियों द्वारा गवाहों को डरा-धमका कर चुप कराया जा रहा है | पीयूडीआर उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन की जांच में जान-बूझकर की जा रही ढील और लोगों को सुरक्षित महसूस कराने में उनकी नाकामयाबी की निंदा करता है | साथ ही पीयूडीआर न्यायालयों की भी निंदा करता है जो लगातार पक्षपातपूर्ण फैसले सुना रहे हैं |
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