Communal Issues

भोपाल फर्ज़ी मुठभेड़ के खिलाफ लखनऊ में धरना दे रहे रिहाई मंच के कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय पुलिस द्वारा की गई बदसलूकी की निंदा!

पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स हाल में हुए भोपाल फर्ज़ी मुठभेड़ के खिलाफ लखनऊ में धरना दे रहे रिहाई मंच के कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय पुलिस द्वारा की गई बदसलूकी की कड़ी निंदा करता है | आज इस देश में गुंडा राज देखने को मिल रहा है | जहां एक तरफ बर्बर तरीके से 8 विचाराधीन कैदियों को, जो की प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े मामलों में अभियुक्त थे, फर्ज़ी मुठभेड़ में मार दिया जाता है | वहीँ दूसरी तरफ इसके खिलाफ उठती आवाज़ों को खुलेआम दबाया जा रहा है |

भोपाल फर्ज़ी मुठभेड़ के खिलाफ लखनऊ में धरना दे रहे रिहाई मंच के कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय पुलिस द्वारा की गई बदसलूकी की निंदा!

पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स हाल में हुए भोपाल फर्ज़ी मुठभेड़ के खिलाफ लखनऊ में धरना दे रहे रिहाई मंच के कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय पुलिस द्वारा की गई बदसलूकी की कड़ी निंदा करता है | आज इस देश में गुंडा राज देखने को मिल रहा है | जहां एक तरफ बर्बर तरीके से 8 विचाराधीन कैदियों को, जो की प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े मामलों में अभियुक्त थे, फर्ज़ी मुठभेड़ में मार दिया जाता है | वहीँ दूसरी तरफ इसके खिलाफ उठती आवाज़ों को खुलेआम दबाया जा रहा है |

पवित्र गाय, अपवित्र शव और दलित

पीयूडीआर गुजरात में गिर सोमनाथ जिले के उना तालुका अंतर्गत मोटा समाधियाला गाँव में गौर-रक्षकों द्वारा चमार जाति के 7 लोगों के साथ मार-पीट, कपड़े उतारने और प्रदर्शन करने की घटना की कड़ी निंदा करता है। इसने हिन्दुत्व के गाय की र

HOLY COW, UNHOLY CARCASS AND DALITS

PUDR condemns the incident of flogging, stripping and parading of seven men belonging to the chamar caste by vigilante gaurakshaks on 11 July 2016 in Mota Samadhiyala village, Una taluka, Gir Somnath District Gujarat, which has brought the Brahmanical character of Hindutva cow politics and the caste character of the state to centre stage. It has been widely reported that the assault took place just outside the police station, using the lathis of the on-duty policemen.

PUDR demands action against the Gurgaon Gau Raksha Dal for assault and violation of fundamental rights of two cattle transporters

PUDR expresses outrage at the barbaric incident of 10th June where, in a horrific example of discrimination and violation of dignity, two men - Rizwan and Mukhtiar - accused of transporting beef from Mewat to Delhi, were forced to eat cow dung by members of the Gurgaon Gau Raksha Dal.

Discharge of Sadhvi Pragya and others in the Malegaon Blast case: Saffronization of Constitutional Agencies

The month of May began with the BJP demanding action against the water mafia in Mumbai under the Maharashatra Control of Organized Crime Act (MCOCA). On the 10th of May Atikh Khan, Rafiq Khan and Javed, all three ragpickers, were charged with MCOCA for allegedly causing fire in the dumping ground at Deonar Mumbai. This was of course followed by the big story - the dropping of charges by the National Investigation Authority under MCOCA against all the accused belonging to the Abhinav Bharat in the Malegaon blast case (MCOCA Special Case No.

The lynch mob of Latehar

 In the early hours of 18th March 2016, Mohammad Majloom Ansari (35) and Inayahtullah Khan (12) were found hanging from a tree in the Balumath forest area in Latehar, Jharkhand. Residents of Balugoan and Nawada villages, Ansari and young Khan were on their way to the weekly cattle fair with their eight buffaloes when they were stopped, thrashed, strangled and hanged by a lynch mob.

पीयूडीआर मांग करता है कि मुज़फ्फरनगर दंगों के गवाहों को न्यायालयों द्वारा तुरंत सुरक्षा दी जाए, और न्यायपूर्ण फैसले दिए जाएँ !

2013 में मुज़फ्फरनगर में हुऐ दंगों से सम्बंधित हत्याओं, बलात्कार, लूट और आगज़नी के मामलों में आरोपियों के बरी होने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं | पीयूडीआर चिंता व्यक्त करता है कि 2013 में मुज़फ्फरनगर के दंगों के बाद डर और खुली छूट का जो माहौल बना था, वह आज भी बरकरार है | आरोपियों द्वारा गवाहों को डरा-धमका कर चुप कराया जा रहा है | पीयूडीआर उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन की जांच में जान-बूझकर की जा रही ढील और लोगों को सुरक्षित महसूस कराने में उनकी नाकामयाबी की निंदा करता है | साथ ही पीयूडीआर न्यायालयों की भी निंदा करता है जो लगातार पक्षपातपूर्ण फैसले सुना रहे हैं |
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