Communal Issues

Do Not Forget The Anti- Sikh Pogrom of 1984!

31 October 2017 - thirty three years have passed since the anti-Sikh pogrom carried out in Delhi between 31st October and 4th November 1984, following the assassination of the then Prime Minister Indira Gandhi by her Sikh body guards.  The official figure of those massacred in the violence stands at 2700, while according to unofficial estimates it is closer to 4000 in Delhi alone.  The genocide spread to another 40 cities including Kanpur, Bokaro, Ranchi etc. over the next few days resulting in about another 5000 deaths.

Do Not Forget The Anti- Sikh Pogrom of 1984!

31 October 2017 - thirty three years have passed since the anti-Sikh pogrom carried out in Delhi between 31st October and 4th November 1984, following the assassination of the then Prime Minister Indira Gandhi by her Sikh body guards.  The official figure of those massacred in the violence stands at 2700, while according to unofficial estimates it is closer to 4000 in Delhi alone.  The genocide spread to another 40 cities including Kanpur, Bokaro, Ranchi etc. over the next few days resulting in about another 5000 deaths.

‘Love-Jihad’, NIA, and Democratic Rights

As the Hadiya-Shefin matter comes up for hearing today, PUDR urges the Apex court to take note of the serious violation of democratic rights of the parties involved in this so-called case of ‘Love-Jihad’. PUDR believes that the case is being used in order to provide legitimacy to the supposed presence of ‘Love-Jihad’ or ‘terror marriages following conversion to Islam’ in the country which is nothing more than a communal political agenda being pushed in the name of national security. For the past few months the courts of the country have been seized of the issue.

भगवा ब्रिगेड के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों की खुलेआम हो रही हत्याओं का सिलसिला कब तक?

पीयूडीआर पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की कड़ी निंदा करता है | ‘गौरी लंकेश पत्रिका’ की संपादक लंकेश की 5 सितंबर को बेंगलुरु में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई | कन्नड़ भाषा में प्रकाशित इस पत्रिका के माध्यम से गौरी लगातार जाति व्यवस्था, अंधविश्वास, कट्टरपंथी हिंदुत्ववाद, फासीवाद, भ्रष्टाचार और लिंग आधारित भेदभाव आदि के खिलाफ लिखती आईं थीं | उनके लेखन में वे सीधा बीजेपी, आरएसएस और इनसे जुड़े संगठनों और नेताओं की तीखी आलोचना करती आईं थीं | उनके आखिरी संपादकीय ‘फ़ेक न्यूज़ के ज़माने में  में भी उन्होने प्रधानमंत्री मोदी, बीजेपी, और आरएसएस द्वारा मीडिया पर झूठ पर आधारित दुष्प्रचार की पोल खोल

दमन, दंडमुक्ति और जाति: सहारनपुर में दलितों पर राजपूतों के हमले की एक घटना पर एक रिपोर्ट

5 मई 2017 को शब्बीरपुर गाँव, जिला सहारनपुर उत्तर प्रदेश, में राजपूतों द्वारा दलितों पर हमले की एक घटना हुई। इस हिंसा के दौरान एक राजपूत युवक की मृत्यु हो गई थी, 13 दलित लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, 40 दलित घरों को जला दिया गया था व दलितों की कुछ दुकानों को लूटा और जलाया गया था। मीडिया ने इस हिंसक घटना को राजपूतों और दलितों के बीच हुई हिंसा-प्रतिहिंसा के तौर पर रिपोर्ट किया।

गाय गाथा - करनाल में हरियाणा गौ वंश संरक्षण एवं गौ संवर्धन अधिनियम और इसके परिणाम

जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार केंद्र में सत्ता में आई है तब से गौवंश के लिए सतर्कता की बढ़ती घटनाएं और गौ वध आरै गौ मांस (बीफ) बंदी से संबंधित कानूनों से छेड़छाड़ की खबरें लगातार सुर्खियां में हैं। गौ रक्षा के प्रत्यक्ष रूप से सांप्रदायिक व जातीय एजेंडा से होने वाली हिंसा के शिकार अकसर वे लोग हो रहे हैं जो या तो मवेशी व्यापारी हैं या किसी भी तरह बीफ खरीदने, खाने या इसकी ढुलाई करने से जुड़े हैं, इनमें से अधिकांश मुसलमान व दलित हैं। प्रेस में इन भयानक घटनाओं को तो कवर किया जा रहा है लेकिन इस गौ रक्षा आन्दोलन के दूरगामी परिणामों को नजरअंदाज किया जा रहा है, विशेषकर जिस तरह से राज्य के कानून के

Cow Tale: Haryana Gauvansh Sanrakshan and Gausamvardhan Act in Karnal and its economic and administrative fallouts

The increasing instances of cow vigilantism and legal interpolations related to beef ban and cow slaughter have been making news from the time Bhartiya Janata Party led Central Government came to power. The overtly communal and casteist agenda of cow protectionism has often resulted in violence on cattle-traders and others involved in the sale, transport or consumption of beef in any way, with the majority of those attacked being Muslims and Dalits.

Simmering Social Impunity: A Report on incidents of Rajput intolerance to Dalit assertion in Saharanpur

On 5th May 2017, an incident of attack on Dalits by the Rajputs occurred in the village Shabbirpur, located near Saharanpur, Uttar Pradesh. During the attack a youth from the Rajput community died, 13 Dalits were grievously injured, more than 40 Dalit houses were burnt, some of their shops looted and burnt. The incident was widely reported in the media as an incident of caste violence between the Rajputs and the Dalits, where 25 houses of Dalits were set on fire. A PUDR team conducted a fact-finding into the incident on 9th May 2017.

भोपाल फर्ज़ी मुठभेड़ के खिलाफ लखनऊ में धरना दे रहे रिहाई मंच के कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय पुलिस द्वारा की गई बदसलूकी की निंदा!

पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स हाल में हुए भोपाल फर्ज़ी मुठभेड़ के खिलाफ लखनऊ में धरना दे रहे रिहाई मंच के कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय पुलिस द्वारा की गई बदसलूकी की कड़ी निंदा करता है | आज इस देश में गुंडा राज देखने को मिल रहा है | जहां एक तरफ बर्बर तरीके से 8 विचाराधीन कैदियों को, जो की प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े मामलों में अभियुक्त थे, फर्ज़ी मुठभेड़ में मार दिया जाता है | वहीँ दूसरी तरफ इसके खिलाफ उठती आवाज़ों को खुलेआम दबाया जा रहा है |

भोपाल फर्ज़ी मुठभेड़ के खिलाफ लखनऊ में धरना दे रहे रिहाई मंच के कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय पुलिस द्वारा की गई बदसलूकी की निंदा!

पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स हाल में हुए भोपाल फर्ज़ी मुठभेड़ के खिलाफ लखनऊ में धरना दे रहे रिहाई मंच के कार्यकर्ताओं के साथ स्थानीय पुलिस द्वारा की गई बदसलूकी की कड़ी निंदा करता है | आज इस देश में गुंडा राज देखने को मिल रहा है | जहां एक तरफ बर्बर तरीके से 8 विचाराधीन कैदियों को, जो की प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े मामलों में अभियुक्त थे, फर्ज़ी मुठभेड़ में मार दिया जाता है | वहीँ दूसरी तरफ इसके खिलाफ उठती आवाज़ों को खुलेआम दबाया जा रहा है |

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