Undemocratic Laws

राजनैतिक मुकदमे का घातक नतीजा - यू.ए.पी.ए. और गढ़चिरोली सत्र न्यायालय का फैसला

गढ़चिरोली सत्र न्यायालय में चले मुकदमे का फैसला, जिसमें पाँच लोगों, जी.एन.साईबाबा, महेश तिरकी, पांडू नरोटे, प्रशांत राही और हेम मिश्रा को आजीवन कारावास और विजय तिरकी को 10 साल की कैद की सज़ा सुनाई गई है, एक विचारधारा और नृशंस यू.ए.पी.ए. कानून द्वारा प्रतिबंधित संगठन के राजनैतिक अभियोजन का स्पष्ट उदाहरण है। इन छः अभियुक्तों को एक प्रतिबंधित संगठन सी.पी.आई. (माओवादी) का सदस्य होने का अपराधी ठहराया गया है और इसलिए उन्हें राजसत्ता के खिलाफ ‘षड़यंत्र’ करने का दोषी माना गया है, जबकि उनके खिलाफ, इस ‘षड़यंत्र’ को अंजाम देने के लिए किसी तरह का अपराध करने के कोई सबूत मौजूद नहीं हैं। उन पर यू.ए.पी.ए.

Political Trial Results in Pernicious Verdict: UAPA and the Gadchiroli Sessions Court judgment

The trial and conviction of six persons by the Court of Sessions Judge, Gadchiroli, sentencing GN Saibaba, Maheshi Tirki, Pandu Narote, Prashant Rahi and Hem Mishra, to life imprisonment and Vijay Tirki to ten years, is an unconcealed example of a political trial of an ideology and an organization under the draconian UAPA.

23/04/17 - उजड़ता लोकतंत्र - यूएपीए और राजनैतिक मुकदमें

पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर)

आम सभा निमंत्रण

उजड़ता लोकतंत्र - यूएपीए और राजनैतिक मुकदमें

 

वक्ता – अरुण फरेरा (कमिटी फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ डेमोक्रेटिक राइट्स, मुंबई), शरफुद्दीन अहमद (पीपल्स मूवमेंट अगेंस्ट यूएपीए, केरल), गौतम नवलखा (पीयूडीआर, दिल्ली)

 

दिनांक – 23 अप्रैल 2017, समय – शाम 3.45 बजे, जगह – आईएसआई, लोधी रोड, साईं मंदिर के पास, नई दिल्ली, जवालाहर लाल नेहरु स्टेडियम मेट्रो स्टेशन के पास

 

23/04/2017 - Eroded Democracy: The Unlawful Activities Prevention Act (UAPA) & Political Trials

PEOPLES UNION FOR DEMOCRATIC RIGHTS (PUDR)

Public Meeting Invite

Eroded Democracy: The Unlawful Activities Prevention Act (UAPA) & Political Trials

 

Speakers: Arun Ferreira (Committee for the Protection of Democratic Rights, Mumbai), Sharfuddin Ahmed (People’s Movement Against UAPA, Kerala), Gautam Navlakha (People’s Union for Democratic Rights, Delhi)

 

बारा हत्याकांड मामले में फांसी की सज़ा को उम्रकैद में बदला जाना: अधूरा न्याय

1992 में बिहार के हुए बारा हत्याकांड के मामले, जिसमें 35 भूमिहार जाति के लोगों की हत्या हुई थी, के सज़ायाफ्ता नन्हे लाल मोची, वीर कुअर पासवान, कृष्णा मोची (तीनों दलित) और धमेन्द्र सिंह की फांसी की सज़ा को राष्ट्रपति द्वारा उम्रकैद में बदले जाने का पीयूडीआर स्वागत करता है। परन्तु इस मामले में फांसी को उम्रकैद में बदला जाना अधूरा न्याय है क्योंकि इससे संबंधित शर्तों के बारे में किसी तरह की स्पष्टता के अभाव में ये चार कैदी अनिश्चित समय के लिए जेल में सड़ते रहेंगे। इन चार कैदियों को 2001 में टाडा डेज़िगनेटिड कोर्ट ने एक अत्यधिक पक्षपाती मुकदमे द्वारा फांसी की सज़ा सुनाई थी और 2002 में सर्वोच्च न्याय

Commutation of Death Sentence in the Bara Massacre Case: Justice Half Done

PUDR welcomes the decision of the President commuting the death sentences of Nanhe Lal Mochi, Veer Kuar Paswan, Krishna Mochi and Dharmender Singh, convicted in the Bara massacre of 1992 for killing 35 members of the Bhumihar caste in Bihar. Commutation in this case, however, is justice half done as the four prisoners will continue to languish in jail indefinitely in the absence of any clarity on the terms of commutation. The four prisoners were sentenced to death in 2001 by a TADA designated court in an extremely biased trial and the sentence was upheld by the Supreme Court in 2002.

CDRO condemns the arrest of Fact Finding team by Telangana police

CDRO  strongly condemns the arrest of a 7 member Fact Finding team by the Telangana police at Dummagudem village of Bhadrachalam district on 25th December, 2016 at 6 pm and in turn handing them over to the Sukma Police (Chhattisgarh State). We also strongly object to the way Sukma Police foisted false cases against the Fact Finding team members under Sections 8(1),(2) (3)and (5) of the Chhattisgarh State Public Security Act.

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